वाल्मीकि रामायण 7.29.14
एष ह्यतिबलः सैन्यै रथेन पवनौजसा ।गमिष्यति प्रवृद्धोर्मिः समुद्र इव पर्वणि॥
eṣa hyatibalaḥ sainyai rathena pavanaujasā |gamiṣyati pravṛddhormiḥ samudra iva parvaṇi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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