वाल्मीकि रामायण 7.29.23
तां प्रविश्य महामायां प्राप्तां गोपतिना पुरा ।प्रविवेश सुसंरब्धस्तत्सैन्यं समभिद्रवत्॥
tāṃ praviśya mahāmāyāṃ prāptāṃ gopatinā purā |praviveśa susaṃrabdhastatsainyaṃ samabhidravat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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