वाल्मीकि रामायण 7.29.29
स तं यदा परिश्रान्तमिन्द्रं जज्ञे ऽथ रावणिः ।तदैनं मायया बद्ध्वा स्वसैन्यमभितो ऽनयत्॥
sa taṃ yadā pariśrāntamindraṃ jajñe 'tha rāvaṇiḥ |tadainaṃ māyayā baddhvā svasainyamabhito 'nayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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