वाल्मीकि रामायण 7.29.34
स तं दृष्ट्वा परिम्लानं प्रहारैर्जर्जरीकृतम् ।रावणिः पितरं युद्धे दर्शनस्थो ऽब्रवीदिदम्॥
sa taṃ dṛṣṭvā parimlānaṃ prahārairjarjarīkṛtam |rāvaṇiḥ pitaraṃ yuddhe darśanastho 'bravīdidam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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