वाल्मीकि रामायण 7.30.13
्वं हि कस्यचित्प्राणिनो भुवि ।अथाब्रवीत्स तत्रस्थं मेघनादो महाबलः ।श्रूयतां वा भवेत्सिद्धिः शतक्रतुविमोक्षणे॥
vaṃ hi kasyacitprāṇino bhuvi |athābravītsa tatrasthaṃ meghanādo mahābalaḥ |śrūyatāṃ vā bhavetsiddhiḥ śatakratuvimokṣaṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें