वाल्मीकि रामायण 7.30.34
अयं तु भावो दुर्बुद्धे यस्त्वयेह प्रवर्तितः ।मानुषेष्वपि लोकेषु भविष्यति न संशयः॥
ayaṃ tu bhāvo durbuddhe yastvayeha pravartitaḥ |mānuṣeṣvapi lokeṣu bhaviṣyati na saṃśayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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