वाल्मीकि रामायण 7.30.38
रूपयौवनसम्पन्ना यस्मात्त्वमनवस्थिता ।तस्माद्रूपवती लोके न त्वमेका भविष्यति॥
rūpayauvanasampannā yasmāttvamanavasthitā |tasmādrūpavatī loke na tvamekā bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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