वाल्मीकि रामायण 7.30.55
एवं राम समुद्भूतो रावणो लोककण्टकः ।सपुत्रो येन सङ्ग्रामे जितः शक्रः सुरेश्वरः॥
evaṃ rāma samudbhūto rāvaṇo lokakaṇṭakaḥ |saputro yena saṅgrāme jitaḥ śakraḥ sureśvaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें