वाल्मीकि रामायण 7.31.35
राक्षसेन्द्रगजैस्तैस्तु क्षोभिता नर्मदा नदी ।वामनाञ्जनपद्माद्यैर्गङ्गा इव महागजैः॥
rākṣasendragajaistaistu kṣobhitā narmadā nadī |vāmanāñjanapadmādyairgaṅgā iva mahāgajaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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