वाल्मीकि रामायण 7.32.4
जिज्ञासुः स तु बाहूनां सहस्रस्योत्तमं बलम् ।रुरोध नर्मदावेगं बाहुभिर्बहुभिर्वृतः॥
jijñāsuḥ sa tu bāhūnāṃ sahasrasyottamaṃ balam |rurodha narmadāvegaṃ bāhubhirbahubhirvṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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