वाल्मीकि रामायण 7.34.16
जिघृक्षमाणमायान्तं रावणं पापचेतसम् ।कक्षावलम्बिनं कृत्वा गमिष्ये त्रीन्महार्णवान्॥
jighṛkṣamāṇamāyāntaṃ rāvaṇaṃ pāpacetasam |kakṣāvalambinaṃ kṛtvā gamiṣye trīnmahārṇavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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