वाल्मीकि रामायण 7.34.39
त्रयाणामेव भूतानां गतिरेषा प्लवङ्गम ।मनोनिलसुपर्णानां तव चात्र न संशयः॥
trayāṇāmeva bhūtānāṃ gatireṣā plavaṅgama |manonilasuparṇānāṃ tava cātra na saṃśayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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