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वाल्मीकि रामायण 7.36.32
जानन्त ऋषयस्तं वै सहन्ते तस्य शक्तितः॥
jānanta ṛṣayastaṃ vai sahante tasya śaktitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंजानन्त ऋषयस्तं वै सहन्ते तस्य शक्तितः॥
jānanta ṛṣayastaṃ vai sahante tasya śaktitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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