वाल्मीकि रामायण 7.36.5
प्राणवन्तमिमं दृष्ट्वा प्राणो गन्धवहो मुदा ।चचार सर्वभूतेषु सन्निरुद्धं यथा पुरा॥
prāṇavantamimaṃ dṛṣṭvā prāṇo gandhavaho mudā |cacāra sarvabhūteṣu sanniruddhaṃ yathā purā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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