वाल्मीकि रामायण 7.36.7
ततस्त्रियुग्मस्त्रिककुत्ऺित्रधामा त्रिदशार्चितः ।उवाच देवता ब्रह्मा मारुतप्रियकाम्यया॥
tatastriyugmastrikakutऺिtradhāmā tridaśārcitaḥ |uvāca devatā brahmā mārutapriyakāmyayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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