वाल्मीकि रामायण 7.36.8
भो महेन्द्रेशवरुणप्रजेश्वरधनेश्वराः ।जानतामपि वः सर्वं वक्ष्यामि श्रूयतां हितम्॥
bho mahendreśavaruṇaprajeśvaradhaneśvarāḥ |jānatāmapi vaḥ sarvaṃ vakṣyāmi śrūyatāṃ hitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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