वाल्मीकि रामायण 7.37.3
ते रक्तकण्ठिनः सर्वे किन्नरा इव शिक्षिताः ।तुष्टुवुर्नपतिं वीरं यथावत् सम्प्रहर्षिणः॥
te raktakaṇṭhinaḥ sarve kinnarā iva śikṣitāḥ |tuṣṭuvurnapatiṃ vīraṃ yathāvat sampraharṣiṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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