वाल्मीकि रामायण 7.37.5
विक्रमस्ते यथा विष्णो रूपं चैवाश्विनोरिव ।बुद्ध्या बृहस्पतेस्तुल्यः प्रजापतिसमो ह्यसि॥
vikramaste yathā viṣṇo rūpaṃ caivāśvinoriva |buddhyā bṛhaspatestulyaḥ prajāpatisamo hyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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