वाल्मीकि रामायण 7.38.17
दर्शिता भवता प्रीतिर्दर्शितं सौहृदं परम् ।उद्योगश्च कृतो राजन्भरतेन त्वया सह॥
darśitā bhavatā prītirdarśitaṃ sauhṛdaṃ param |udyogaśca kṛto rājanbharatena tvayā saha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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