वाल्मीकि रामायण 7.38.3
भवान्हि गतिरव्यग्रा भवता पालिता वयम् ।भवतस्तेजसोग्रेण रावणो निहतो मया॥
bhavānhi gatiravyagrā bhavatā pālitā vayam |bhavatastejasogreṇa rāvaṇo nihato mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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