वाल्मीकि रामायण 7.38.32
बाढमित्येव राजानो हर्षेण परमान्विताः ।उचुः प्राञ्जलयः सर्वे राघवं गमनोत्सुकाः॥
bāḍhamityeva rājāno harṣeṇa paramānvitāḥ |ucuḥ prāñjalayaḥ sarve rāghavaṃ gamanotsukāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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