वाल्मीकि रामायण 7.39.18
सुग्रीवमन्त्रिते युक्तौ मम चापि हिते रतौ ।अर्हतो विविधां पूजां त्वत्कृते वै हरीश्वर॥
sugrīvamantrite yuktau mama cāpi hite ratau |arhato vividhāṃ pūjāṃ tvatkṛte vai harīśvara ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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