वाल्मीकि रामायण 7.39.23
मधुरं श्लक्ष्णया वाचा नेत्राभ्यामापिबन्निव ।सुहृदो मे भवन्तश्च शरीरं भ्रातरस्तथा॥
madhuraṃ ślakṣṇayā vācā netrābhyāmāpibanniva |suhṛdo me bhavantaśca śarīraṃ bhrātarastathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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