वाल्मीकि रामायण 7.4.8
राघवस्य वचः श्रुत्वा संस्कारालङ्कृतं शुभम् ।ईषद्विस्मयमानस्तमगस्त्यः प्राह राघवम्॥
rāghavasya vacaḥ śrutvā saṃskārālaṅkṛtaṃ śubham |īṣadvismayamānastamagastyaḥ prāha rāghavam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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