वाल्मीकि रामायण 7.42.2
चन्दनागुरुचूतैश्च तुङ्गकालेयकैरपि ।देवदारुवनैश्चापि समन्तादुपशोभिताम्॥
candanāgurucūtaiśca tuṅgakāleyakairapi |devadāruvanaiścāpi samantādupaśobhitām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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