वाल्मीकि रामायण 7.43.19
अस्माकमपि दारेषु सहनीयं भविष्यति ।यथा हि कुरुते राजा प्रजा तमनुवर्तते॥
asmākamapi dāreṣu sahanīyaṃ bhaviṣyati |yathā hi kurute rājā prajā tamanuvartate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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