वाल्मीकि रामायण 7.43.21
तस्यैवं भाषितं श्रुत्वा राघवः परमार्तवत् ।उवाच सुहृदः सर्वान्कथमेतद्ब्रवीथ माम्॥
tasyaivaṃ bhāṣitaṃ śrutvā rāghavaḥ paramārtavat |uvāca suhṛdaḥ sarvānkathametadbravītha mām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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