वाल्मीकि रामायण 7.43.3
एते कथा बहुविधाः परिहाससमन्विताः ।कथयन्ति स्म संहृष्टा राघवस्य महात्मनः॥
ete kathā bahuvidhāḥ parihāsasamanvitāḥ |kathayanti sma saṃhṛṣṭā rāghavasya mahātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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