वाल्मीकि रामायण 7.43.8
अमुं तु विजयं सौम्य दशग्रीववधार्जितम् ।भूयिष्ठं स्वपुरे पौरैः कथ्यन्ते पुरुषर्षभ॥
amuṃ tu vijayaṃ saumya daśagrīvavadhārjitam |bhūyiṣṭhaṃ svapure pauraiḥ kathyante puruṣarṣabha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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