वाल्मीकि रामायण 7.44.2
शीघ्रमानय सौमित्रिं लक्ष्मणं शुभलक्षणम् ।भरतं च महाभागं शत्रुघ्नमपराजितम्॥
śīghramānaya saumitriṃ lakṣmaṇaṃ śubhalakṣaṇam |bharataṃ ca mahābhāgaṃ śatrughnamaparājitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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