वाल्मीकि रामायण 7.46.18
लक्ष्मणो ऽर्थं ततः श्रुत्वा शिरसा वन्द्य मैथिलीम् ।शिवमित्यब्रवीद्धृष्टो हृदयेन विशुष्यता॥
lakṣmaṇo 'rthaṃ tataḥ śrutvā śirasā vandya maithilīm |śivamityabravīddhṛṣṭo hṛdayena viśuṣyatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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