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वाल्मीकि रामायण 7.46.24
निरीक्ष्य लक्ष्मणो दीनः प्ररुरोद महास्वनः॥
nirīkṣya lakṣmaṇo dīnaḥ praruroda mahāsvanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंनिरीक्ष्य लक्ष्मणो दीनः प्ररुरोद महास्वनः॥
nirīkṣya lakṣmaṇo dīnaḥ praruroda mahāsvanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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