वाल्मीकि रामायण 7.49.14
अपापां वेद्मि सीते त्वां तपोलब्धेन चक्षुषा ।विस्रब्धा भव वैदेहि साम्प्रतं मयि वर्तसे॥
apāpāṃ vedmi sīte tvāṃ tapolabdhena cakṣuṣā |visrabdhā bhava vaidehi sāmprataṃ mayi vartase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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