वाल्मीकि रामायण 7.49.6
न ह्येनां मानुषीं विद्मः सत्क्रिया ऽस्याः प्रयुज्यताम् ।आश्रमस्याविदूरे च त्वामियं शरणं गता॥
na hyenāṃ mānuṣīṃ vidmaḥ satkriyā 'syāḥ prayujyatām |āśramasyāvidūre ca tvāmiyaṃ śaraṇaṃ gatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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