वाल्मीकि रामायण 7.49.8
तं प्रयान्तमभिप्रेत्य शिष्या ह्येनं महामतिम् ।तं तु देशमभि प्रेत्य किञ्चित्पद्भ्यां महामतिः॥
taṃ prayāntamabhipretya śiṣyā hyenaṃ mahāmatim |taṃ tu deśamabhi pretya kiñcitpadbhyāṃ mahāmatiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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