वाल्मीकि रामायण 7.50.2
अब्रवीच्च महातेजाः सुमन्त्रं मन्त्रसारथिम् ।सीतासन्तापजं दुःखं पश्य रामस्य सारथे॥
abravīcca mahātejāḥ sumantraṃ mantrasārathim |sītāsantāpajaṃ duḥkhaṃ paśya rāmasya sārathe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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