वाल्मीकि रामायण 7.51.11
तच्छ्रुत्वा व्याहृतं वाक्यं राज्ञो दशरथस्य च ।दुर्वासाः सुमहातेजा व्याहर्तुमुपचक्रमे॥
tacchrutvā vyāhṛtaṃ vākyaṃ rājño daśarathasya ca |durvāsāḥ sumahātejā vyāhartumupacakrame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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