वाल्मीकि रामायण 7.51.15
ततस्तां निहतां दृष्ट्वा पत्नीं भृगुकुलोद्वहः ।शशाप सहसा क्रुद्धो विष्णुं रिपुकुलार्दनम्॥
tatastāṃ nihatāṃ dṛṣṭvā patnīṃ bhṛgukulodvahaḥ |śaśāpa sahasā kruddho viṣṇuṃ ripukulārdanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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