वाल्मीकि रामायण 7.51.2
पुरा नाम्ना हि दुर्वासा अत्रेः पुत्रो महामुनिः ।वसिष्ठस्याश्रमे पुण्ये वार्षिक्यं समुवास ह॥
purā nāmnā hi durvāsā atreḥ putro mahāmuniḥ |vasiṣṭhasyāśrame puṇye vārṣikyaṃ samuvāsa ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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