वाल्मीकि रामायण 7.56.24
अनेन दुष्कृतेन त्वं मत्क्रोधकलुषीकृता ।मनुष्यलोकमास्थाय कञ्चित्कालं निवत्स्यसि॥
anena duṣkṛtena tvaṃ matkrodhakaluṣīkṛtā |manuṣyalokamāsthāya kañcitkālaṃ nivatsyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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