वाल्मीकि रामायण 7.56.7
भगवन्निमिशापेन विदेहत्वमुपागमम् ।लोकनाथ महादेव अण्डजो ऽपि त्वमब्जजः॥
bhagavannimiśāpena videhatvamupāgamam |lokanātha mahādeva aṇḍajo 'pi tvamabjajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें