वाल्मीकि रामायण 7.57.13
सुप्रीताश्च सुराः सर्वे निमेश्चेतस्तथाब्रुवन् ।वरं वरय राजर्षे क्व ते चेतो निरूप्यताम्॥
suprītāśca surāḥ sarve nimeścetastathābruvan |varaṃ varaya rājarṣe kva te ceto nirūpyatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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