वाल्मीकि रामायण 7.58.11
पूरुस्तु दयितो राज्ञो गुणैर्मातृकृतेन च ।ततो दुःखसमाविष्टो यदुर्मातरमब्रवीत्॥
pūrustu dayito rājño guṇairmātṛkṛtena ca |tato duḥkhasamāviṣṭo yadurmātaramabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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