वाल्मीकि रामायण 7.58.1
एवं ब्रुवति रामे तु लक्ष्मणः परवीरहा ।प्रत्युवाच महात्मानं ज्वलन्तमिव तेजसा॥
evaṃ bruvati rāme tu lakṣmaṇaḥ paravīrahā |pratyuvāca mahātmānaṃ jvalantamiva tejasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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