वाल्मीकि रामायण 7.59.15
पितरं गुरुभूतं मां यस्मात्त्वमवमन्यसे ।राक्षसान्यातुधानांस्त्वं जनयिष्यसि दारुणान्॥
pitaraṃ gurubhūtaṃ māṃ yasmāttvamavamanyase |rākṣasānyātudhānāṃstvaṃ janayiṣyasi dāruṇān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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