वाल्मीकि रामायण 7.59.19
पूरुश्चकार तद्राज्यं धर्मेण महता वृतः ।प्रतिष्ठाने पुरवरे काशिराज्ये महायशाः॥
pūruścakāra tadrājyaṃ dharmeṇa mahatā vṛtaḥ |pratiṣṭhāne puravare kāśirājye mahāyaśāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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