वाल्मीकि रामायण 7.6.68
सुपर्णपृष्ठे स बभौ श्यामः पीताम्बरो हरिः ।काञ्चनस्य गिरेः शृङ्गे सतडित्तोयदो यथा॥
suparṇapṛṣṭhe sa babhau śyāmaḥ pītāmbaro hariḥ |kāñcanasya gireḥ śṛṅge sataḍittoyado yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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