वाल्मीकि रामायण 7.60.3
ततः सुमन्त्रस्त्वागम्य राघवं वाक्यमब्रवीत् ।एते प्रतिहता राजन्द्वारि तिष्ठन्ति तापसाः॥
tataḥ sumantrastvāgamya rāghavaṃ vākyamabravīt |ete pratihatā rājandvāri tiṣṭhanti tāpasāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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