वाल्मीकि रामायण 7.61.15
यावत्करस्थः शूलो ऽयं भविष्यति सुतस्य ते ।अवध्यः सर्वभूतानां शूलहस्तो भविष्यति॥
yāvatkarasthaḥ śūlo 'yaṃ bhaviṣyati sutasya te |avadhyaḥ sarvabhūtānāṃ śūlahasto bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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