वाल्मीकि रामायण 7.61.2
तथा ब्रुवति काकुत्स्थे भार्गवो वाक्यमब्रवीत् ।भयानां शृणु यन्मूलं देशस्य च नरेश्वर॥
tathā bruvati kākutsthe bhārgavo vākyamabravīt |bhayānāṃ śṛṇu yanmūlaṃ deśasya ca nareśvara ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें